मालीपर्बत बॉक्साइट खनन के खिलाफ विरोध तेज़, अब आदिवासी महिलाओं ने संभाला मोर्चा

ग्रामीणों पर पुलिस अत्याचार का आरोप लगाते हुए, आंदोलनकारियों ने कहा कि ग्रामीणों के मन में डर पैदा करने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से गांवों में लगातार छापेमारी की जा रही है.

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हिंडाल्को के मालीपर्बत बॉक्साइट खनन के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ रहा है. बुधवार को इसके खिलाफ कई आदिवासी महिलाओं ने 22 नवंबर को होने वाली पर्यावरण मंजूरी के लिए दूसरी जनसुनवाई रद्द करने की मांग की.

हिंडाल्को ग्रुप के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सेमिलीगुडा ब्लॉक के अलग-अलग गांवों की सैकड़ों महिलाएं कलेक्ट्रेट पर जमा हुईं, और इस बारे में एडीएम रामेश्वर प्रधान के माध्यम से कलेक्टर मोहम्मद अब्दाल अख्तर को एक ज्ञापन सौंपा. 

इस ज्ञापन की एक कॉपी ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (ओएसपीसीबी) के सदस्य सचिव को भी भेजी गई है.

ग्रामीणों पर पुलिस अत्याचार का आरोप लगाते हुए, आंदोलनकारियों ने कहा कि ग्रामीणों के मन में डर पैदा करने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से गांवों में लगातार छापेमारी की जा रही है. 

आंदोलन में शामिल एक आदिवासी महिला ने आरोप लगाया, “हिंडाल्को एजेंट गांव-गांव जा रहे हैं और मालीपर्बत सुरक्षा समिति (एमपीएसएस) के सदस्यों के साथ-साथ लोगों को दूसरी जनसुनवाई का विरोध न करने की धमकी दे रहे हैं.” 

इससे पहले 22 सितंबर को कंकदंबा गांव में जनसुनवाई बाधित होने के बाद एमपीएसएस के नेताओं समेत 28 ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया था.

प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई है की बैठक निष्पक्ष तरीके से आयोजित नहीं होगी, क्योंकि विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले उनके ज्यादातर वरिष्ठ नेता जेल में हैं. 

एक दूसरी महिला ने कहा, “ऐसी स्थिति में जनसुनवाई करना मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन होगा.” 

एमपीएसएस के उपाध्यक्ष डेलीम बसा खोरा ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस का बताया कि वे खनन विरोधी संगठन के जेल में बंद सदस्यों की रिहाई के बाद ही इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रशासन के साथ चर्चा करेंगे. 

इस साल अप्रैल में, हिंडाल्को को 50 साल के लिए पट्टे का विस्तार मिला और उसे नए पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई.

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