केरल: वायनाड बना देश का पहला क़रीब शत प्रतिशत वैक्सिनेटेड ज़िला

आदिवासी-बहुल इस ज़िले में कुल 6,51,967 लोग इस वैक्सीन के योग्य हैं. इनमें से रविवार शाम सात बजे तक 6,15,729 को वैक्सीन की पहली डोज़ दी जा चुकी है. इसका मतलब ज़िले के क़रीब 95 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लग गया है.

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केरल का वायनाड देश का पहला ज़िला बन गया है जहां योग्य आबादी का क़रीब शत प्रतिशत हिस्सा कोविड के ख़िलाफ़ वैक्सिनेट हो चुका है.

आदिवासी-बहुल इस ज़िले में कुल 6,51,967 लोग इस वैक्सीन के योग्य हैं. इनमें से रविवार शाम सात बजे तक 6,15,729 को वैक्सीन की पहली डोज़ दी जा चुकी है. इसका मतलब ज़िले के क़रीब 95 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लग गया है.

अब बस 36,238 लोग बचे हैं जिन्हें वैक्सीन लगना है. उनमें भी 24,529 ऐसे हैं जिन्हें पिछले तीन महीनों में COVID हुआ, तो उन्हें वैक्सीन के लिए इंतज़ार करना हागा. इसके अलावा 1,243 लोगों ने वैक्सीन लेने से इंकार कर दिया है. बाकी लोग फडिलहाल क्वॉरंटाइन में हैं.

इन लोगों को छेड़कर वैक्सिनेशन के लिए योग्य लगभग 100% आबादी को वैक्सीन लगाया जा चुका है. जिला कलेक्टर अदीला अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया कि इस मुक़ाम को हासिल करना एक मुश्किल काम था, लेकिन सफ़लता का पूरा श्रेय स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को जाता है.

अब्दुल्ला ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “ज़िले में 16 जनवरी को वैक्सिनेसन प्रक्रिया शुरू हुई और प्रशासन ने एक लक्ष्य निर्धारित कर फ़रवरी में प्रक्रिया शुरू कर दी. हमने आठ विभागों की भागीदारी देखी. इनमें स्थानीय स्वशासन, राजस्व, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, परिवहन, पुलिस, कुडुम्बश्री और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग शामिल हैं. इसके अलावा, हमें विधायकों, सांसदों और मंत्रियों का समर्थन भी मिला.”

हालांकि वायनाड ज़िले की आबादी कम है, लेकिन हासिल किए गए इस मुक़ाम को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. क्योंकि देश में कई ऐसे जिले हैं, जहां वायनाड की तुलना में आबादी कम है, लेकिन वो यूनिवर्सल वैक्सिनेशन के लक्ष्य से काफ़ी दूर हैं.

उम्मीद की जा रही है कि लगभग शत-प्रतिशत वैक्सिनेशन वाले ज़िले की उपलब्धि से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. वायनाड के लोगों के लिए पर्यटन ही आय का एक प्रमुख स्रोत है. इस मेगा वैक्सिनेशन अभियान के बाद प्रशासन ज़िले को पर्यटन के लिए जल्द से जल्द खोलना चाहता है.

ज़िले में आदिवासी लोगों की बड़ी संख्या की वजह से दूरदराज़ के गांवों तक पहुंचना बड़ी चुनौती था.  ऊपर से स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी और बारिश के मौसम ने मुश्किलें और बढ़ा दीं.

अनुसूचित जनजाति विकास विभाग और गैर सरकारी संगठनों ने भी इस मिशन में काफ़ी सहयोग दिया. आदिवासियों के बीच वैक्सीन के बारे में जानकारी फैलाने के लिए मार्च मिशन, मॉप-अप अप्रैल और गोत्ररक्षा मई जैसे अभियान चलाए गए.

ज़्यादा से ज़्यादा आदिवासी आबादी को वैक्सिनेशन सेंटरों तक लाने के लिए विशेष अभियानों के अलावा उन्हें खैने-पाने का सामान और कपड़े जैसे उपहार दिए गए.

लेकिन प्रशासन का मिशन अभी ख़त्म नहीं हुआ है. ज़िले में 2,13,277 से ज़्यादा लोगों को COVID वैक्सीन की दूसरी डोज़ लग चुकी है. जिन्हें सिर्फ़ एक डोज़ लगी है, उन्हें दूसरी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

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