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झारखंड: विधानसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुटी जेएमएम, किस पार्टी के जीतने के असार सबसे अधिक

झारखंड में जल्द विधानसभा चुनाव शुरू होने वाले है. हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान झारखंड की राजनीति में काफी उथल-पुथल देखने को मिली है. ऐसी स्थिति में यह देखना दिलचस्प होगा की झारखंड के विधानसभा चुनाव में किस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा?

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) के बाद अब झारखंड की सभी राजनीतिक पार्टियां विधानसभा चुनाव (Jharkhand Vidhan Sabha Election 2024) की तैयारी में जुट चुकी है. झारखंड में विधानसभा चुनाव नवंबर या दिसंबर महीने में होने वाला है.

झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को समाप्त हो जाएगा. राज्य में 81 विधानसभा सीटे हैं. इनमें से 28 सीटे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है.

हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान झारखंड की राजनीति में सोरेन परिवार काफी सुर्खियों में रहा था. वहीं विरोधी दल बीजेपी ने भी आदिवासियों को लुभाने के कई प्रयास किए थे.

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के एक साल पहले अपने 2023-24 के बजट में आदिवासियों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की थी.

इसके अलवा बिरसा मुंडा की जन्म भूमि खूंटी में उनकी जयंती के दिन पीएम-जनमन और जनजातीय गौरव दिवस घोषित भी किया था..

लेकिन बीजेपी द्वारा किए गए सभी प्रयास विफल रहें. क्योंकि झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 5 लोकसभा सीटों में से किसी भी सीट में बीजेपी अपनी जीत दर्ज नहीं कर पाई.

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीज़े घोषित होने के कुछ दिन बाद ही जेएमएम पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2024 की तैयारी भी शुरू कर दी है.

झामुमो पार्टी ने फादर स्टेन स्वामी की मौत और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को आपपास में जोड़ने की कोशिश की है.

दो दिन पहले हेमंत सोरेन के फेसुबक अकाउंट के वॉल में लिखा गया था कि जिस तरह फादर स्टेन स्वामी को सबसे कमज़ोर वर्ग के लिए आवाज उठाने की सज़ा मिली और उन्हें चुप कर दिया गया.

ऐसा ही जुल्म हेमंत सोरेन पर भी हो रहा है. यह भी दावा किया गया कि अगर हेमंत सोरेन जेल से नहीं छूटे तो झारखंड की मौजूदा सरकार राज्य की स्थिति मणिपुर जैसी बना देगी.

अक्टूबर 2019 में अनाईए ने फादर स्टेन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. उनकी गिरफ्तारी के बाद आदिवासी इलाकों में काफी नराज़गी देखी गई थी. जिसका असर सीधा-सीधा पिछले बार हुए विधानसभा चुनाव के नतीज़ो पर पड़ा था.

उस समय राज्य के विधानसभा में आरक्षित सीटों पर झामुमो और कांग्रेस को बहुमत हासिल हुआ था. इन आरक्षित सीटो पर दोनों पार्टियों की जीत का आंकड़ा 93 प्रतिशत रहा था. फादर स्टेन स्वामी की जुलाई 2021 में ही मौत हो गई.

कल्पना सोरेन का उपचुनाव जीतना

कल्पना सोरेन (Kalpana Soren) ने हाल ही में गांडेय विधानसभा में हुए उपचुनाव (Bye Election) में जीत दर्ज की है. उनका मुकाबला बीजेपी के दिलीप वर्मा से था. इस सीट में जीत का अंतर 27,149 रहा है.

आदिवासियों के मुद्दे

झारखंड में 30 अनुसूचित जनजाति रहती है. इनमें से 8 जनजाति को विशेष रूप से कमज़ोर जनजाति (PVTG) की श्रेणी में रखा गया है.

राज्य में आदिवासियों के प्रमुख मुद्दे है- पलायन, बेरोज़गारी, आबादी का कम होना और सरना धर्म.

झारखंड के आदिवासी नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों के आदिवासी भी सरना धर्म कोड की मांग कर रहे हैं.

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान कांग्रेस ने आदिवासियों से यह वादा किया था कि वे उनकी सरना धर्म की मांग पूरी करेंगे.

वहीं झामुमो की गठबंधन सरकार ने नवंबर 2020 में विधानसभा में सरना धर्म के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया था.

इस प्रस्ताव के अनुसार सरना धर्म को 2024 में होने वाली जनगणना में अन्य धर्मो की तरह अलग से जोड़ने के लिए कहा गया था.

लेकिन अभी तक सरना को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

इसके अलावा राज्य में पलायन का मुद्दा एक लंबे समय से चुनौती बने हुआ है.

वहीं गरीबी और जरूरी सुविधाओं के अभाव के कारण राज्य के आदिवासियों में मातृ और शिशु मृत्यु दर अधिक है.

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