12 लाख ऑक्सीजन के जोड़ कर आदिवासी पर किया 1.2 करोड़ का जुर्माना

बम्होरी फॉरेस्ट रेंजर ने बताया कि डायरेक्टर जनरल काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन के मुताबिक एक पेड़ 50 सालों तक करीब 52 लाख रुपए के लाभ देता है. इसमें करीब 12 लाख रुपए की ऑक्सीजन, 24 लाख रुपए का प्रदूषण नियंत्रण, 19 लाख रुपए की मिट्टी कटने से रोकना और 4 लाख रुपए की वॉटर फिल्ट्रेशन को शामिल किया गया है.

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मध्य प्रदेश के रायसेना जिले में वन विभाग ने छोटेलाल भिलाल नाम के आदिवासी पर 1.2 करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया है. इस आदिवासी पर आरोप है कि उसने सागौन के दो पेड़ जंगल से काटे हैं. 

वन विभाग का कहना है कि किसी भी पेड़ से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दो तरह के लाभ मिलते हैं. विभाग का कहना है कि पेड़ की वास्तविक कीमत के साथ-साथ उससे मिलने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष फायदों को भी कैलकुलेट किया गय है. 

उसी आधार पर जुर्माने की रकम तय की गई है. पेड़ काटने का आरोपी रायसेना जिले के सिलवानी गांव का रहने वाला बताया गया है. 

जानकारी के अनुसार छोटे लाल को 5 जनवरी को सिंगोर सैंचुरी में पेड़ काटते हुए देख गया था. उसके बाद से ही छोटे लाल फरार था. 

इसके बाद 26 अप्रैल को उसे गिरफ्तार किया गया. बम्होरी फॉरेस्ट रेंजर ने बताया कि डायरेक्टर जनरल काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन के मुताबिक एक पेड़ 50 सालों तक करीब 52 लाख रुपए के लाभ देता है. 

इसमें करीब 12 लाख रुपए की ऑक्सीजन, 24 लाख रुपए का प्रदूषण नियंत्रण, 19 लाख रुपए की मिट्टी कटने से रोकना और 4 लाख रुपए की वॉटर फिल्ट्रेशन को शामिल किया गया है. 

इस तरह से एक पेड अपनी आयु के दौरान 60 लाख रुपए का लाभ देता है.

वन अधिकारी ने कहा कि छोटे लाल पर पेड़ से मिलने वाले सभी लाभों को जोड़ते हुए जुर्मान लगाया गया है. अधिकारी ने कहा कि छोट लाल आदतन अपराधी है. 

हालाँकि वन विभाग ने यह नहीं बताया है कि अगर छोटेलाल पेड़ काट कर बेचता था तो किसे बेचता था. क्या उस व्यापारी के ख़िलाफ़ भी कोई मामला दर्ज किया गया है जिसे पेड़ बेचा गया था.

इससे पहले भी वो कई बार इसी जुर्म पर पकड़ा गया है. अधिकारी ने बताया कि वो पेड़ काटकर फर्नीचर की दुकानों पर बेचता है. छोटे लाल के परिवार वालों ने वन विभाग के अधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. 

उनके परिवार का कहना है कि वो जंगल से घिरे गांवों में रहते हैं इस लिए पुराने गिर चुके पेड़ों का इस्तेमाल करते हैं.

परिवार का आरोप है कि विभाग के अधिकारी ख़ुद ही वनों में अवैध कटाई में शामिल रहते हैं. उनका आरोप है कि वन विभाग इस परिवार का उत्पीड़न कर रहा है.

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