केरल में आदिवासियों के वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए चलेगा विशेष अभियान

जिन इलाक़ों से आदिवासी काम की तलाश में बाहर जाते हैं, वहाँ पर कोविड का ख़तरा बना हुआ है. आदिवासी आमतौर पर दुर्गम और पहाड़ी इलाक़ों में रहते हैं. प्रशासन का कहना है कि वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए डिजिटल सुविधाएँ आदिवासी इलाक़ों में कम हैं. लेकिन प्रशासन इन इलाक़ों में रजिस्ट्रेशन के लिए विशेष अभियान चला रहा है.

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केरल के आदिवासी बहुल ज़िले वायनाड़ में कोविड 19 का प्रकोप अब आदिवासी आबादी में भी बढ़ रहा है. वायनाड ज़िले की कम से कम 8 आदिवासी बस्तियों तक कोविड 19 पहुँच चुका है. 

ज़िला प्रशासन के अनुसार वायनाड में कम से कम 330 आदिवासियों को कोविड पॉज़िटिव पाया गया है. प्रशासन की तरफ़ से आदिवासी इलाक़ों में कोविड मामलों की निगरानी और बचाव के लिए नोडल ऑफ़िसर की नियुक्ति की है.

वायनाड के नोडल ऑफ़िसर डॉक्टर नीत विजयन ने जानकारी दी है कि ग़ैर आदिवासी क्षेत्रों की तुलना में आदिवासी आबादी में कोविड का प्रकोप कम देखा गया है.

लेकिन अब आदिवासी आबादी भी इस बीमारी की चपेट में आ रही है. उन्होंने कहा है कि प्रशासन का प्रयास है कि आदिवासी इलाक़ों में इस बीमारी को फैलने से जितना संभव हो रोका जा सके.

आदिवासी इलाक़ों तक कोरोनावायरस की पहुँच के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासियों की बस्तियों से भी लोग आजकल कामकाज की तलाश में शहरों में जाते हैं.

ऐसा लगता है कि जो लोग काम की तलाश में बाहर गए थे, उन्हीं से संक्रमण इन बस्तियों में पहुँचा है. 

आदिवासी इलाक़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है

वायनाड की कुल आबादी में क़रीब 18 प्रतिशत आदिवासी आबादी है. अगर वायनाड के कुल कोविड मामलों को देखा जाए तो आदिवासी आबादी में यह संक्रमण कम ही फैला है.

ज़िले में गुरूवार तक क़रीब 8000 कोविड पॉज़िटिव केस दर्ज हुए हैं. उस लिहाज़ से आदिवासी आबादी में संक्रमण की दर कम ही कही जा सकती है.

ज़िला प्रशासन का प्रयास है कि आदिवासी बस्तियों में संक्रमण को ज़्यादा ना फैलने दिया जाए. इसके लिए आदिवासी समुदाय के नौजवानों और छात्रों की मदद ली जा रही है.

इसके अलावा इन इलाक़ों में काम करने वाली आशा नर्सों (ASHA) को भी इस कोशिश में शामिल किया गया है. 

आदिवासी इलाक़ों में कोविड 10 से बचाव के लिए वैक्सीन अभियान की सफलता के लिए विशेष इंतज़ाम किए जा रहे हैं.

प्रशासन का कहना है कि वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए डिजिटल सुविधाएँ आदिवासी इलाक़ों में कम हैं. लेकिन प्रशासन इन इलाक़ों में रजिस्ट्रेशन के लिए विशेष अभियान चला रहा है. 

इसके अलावा ज़िला प्रशासन आदिवासियों के घरों पर ही खाने पीने और ज़रूरी सामान पहुँचा रहा है. 

देश के आदिवासी इलाक़ों में अभी तक कोविड 19 का वैसा प्रकोप नज़र नहीं आया है जैसा ग़ैर आदिवासी क्षेत्रों में देखा जा रहा है.

इसकी मुख्य वजह आदिवासी जीवनशैली को बताया जा रहा है. आमतौर पर आदिवासी आबादी बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क में रहते हैं.

लेकिन जिन इलाक़ों से आदिवासी काम की तलाश में बाहर जाते हैं, वहाँ पर कोविड का ख़तरा बना हुआ है. आदिवासी आमतौर पर दुर्गम और पहाड़ी इलाक़ों में रहते हैं.

इन इलाक़ों में इलाज की सुविधाएँ कम या नहीं होती हैं. इसलिए अगर आदिवासी इलाक़ों में संक्रमण फैलता है तो वह ज़्यादा घातक हो सकता है. 

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