केरल: आदिवासियों के लिए खोली जा रही हैं 100 लाइब्रेरी

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आदिवासी लोगों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लाइब्रेरी को सामुदायिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करना है.

0
188

कुछ समय पहले तक जहां आवारा कुत्ते घूमा करते थे, आज वहां एक हजार से ज्यादा किताबों वाली एक लाइब्रेरी है. धूल के बिना और पेंट के एक ताजा कोट के साथ इस कमरे को जैसे एक नया जीवन ही मिल गया है.

आदिवासी इलाकों में 100 नई लाइब्रेरी खोलने के वायनाड जिला पुस्तकालय परिषद के मिशन के तहत, मनंतवाडी के पास अप्पड में पंचमी कॉलोनी के 60 परिवारों के लिए पहली लाइब्रेरी अब चालू हो गई है.

लाइब्रेरी समिति के अध्यक्ष रामन पी वी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मेरे और कॉलोनी के अधिकांश निवासियों के लिए लाइब्रेरी जाना एक नया अनुभव है. पहले, हमारी कॉलोनी में पढ़ने की कोई जगह नहीं थी. इसलिए लोगों को पढ़ने की आदत भी नहीं थी. लेकिन स्थिति अब धीरे-धीरे बदल रही है. युवा और बच्चे अब लाइब्रेरी में समय बिता रहे हैं.”

रामन का कहना है कि 9 दिसंबर को उद्घाटन के बाद से, पंचमी पुस्तकालय हर दिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक काम कर रहा है.

यहां मौजूद किताबों में उपन्यास, लघु कथाएँ और कविता संग्रह शामिल हैं. बाल साहित्य और करियर मार्गदर्शन पुस्तकें भी उपलब्ध हैं. इसके अलावा, लाइब्रेरी के अलग अलग विषयों पर जागरुकता क्लास भी आयोजित की जा रही हैं.

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आदिवासी लोगों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लाइब्रेरी को सामुदायिक विकास केंद्र के रूप में विकसित करना है.इस दिशा में और भी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं.

इस सुविधा को एक सार्वजनिक लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि आसपास के इलाकों के लोगों को भी फायदा हो.

जिला पुस्तकालय परिषद की नई योजना के तहत वायनाड के पहाड़ी जिले की अलग अलग आदिवासी बस्तियों में 25 नई लाइब्रेरी चालू हो गई हैं.

वायनाड जिला पुस्तकालय परिषद के अध्यक्ष टी बी सुरेश का कहना है कि इस महीने 25 और बाकी की 50 जनवरी तक खोले जाने की उम्मीद है.

किताबों को आदिवासियों की पहुंच में लाने से उनके बीच एक सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवर्तन लाने की उम्मीद की जा रही है. पुस्तकालय परिषद मौजूदा संरचनाओं का नवीनीकरण या प्रयोग करने योग्य स्थान विकसित करके चुनिंदा आदिवासी कॉलोनियों में लाइब्रेरी स्थापित करेगी.

शुरुआत के लिए, हर लाइब्रेरी को 1,000 पुस्तकें दी जा रही हैं.

लाइब्रेरी को चलाने के लिए हर कॉलोनी में आदिवासी युवाओं की एक समिति बनाई गई है.

सेल्फ इम्प्रूवमेंट हब नाम का एक एनजीओ भी इस परियोजना से जुड़ा हुआ है, जो अपनी ‘बुक्स ऑन व्हील्स’ पहल के माध्यम से जनता से एक लाख किताबों को इकट्ठा करनें का लक्ष्य बना रहा है. इस पहल के तहत मिली किताबें परियोजना के प्रथम चरण के लिए जिला पुस्तकालय परिषद को सौंप दी गई हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here