बच्चों के लिए वरदान हैं इस आदिवासी गांव की पहली और इकलौती ग्रैजुएट संध्या

बीकॉम ग्रैजुएट संध्या अपने गांव के बच्चों को फ्री क्लास दे रही हैं. संध्या ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहले बच्चों में ऐसे पढ़ाई करने में ज़्यादा रुचि नहीं थी, लेकिन उनके निरंतर प्रयासों से अब कई बच्चे उनकी क्लास से जुड़ गए हैं.

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तमिलनाडु के कोयंबत्तूर के चिन्नमपति आदिवासी गांव की पहली ग्रैजुएट संध्या कोविड लॉकडाउन में अपने समाज को कुछ वापस दे रही हैं.

लॉकडाउन की वजह से स्कूलों के बंद होने के बाद से इस आदिवासी गांव के बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ी है. लेकिन संध्या उनके लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आई हैं.

बीकॉम ग्रैजुएट संध्या अपने गांव के बच्चों को फ्री क्लास दे रही हैं. संध्या ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहले बच्चों में ऐसे पढ़ाई करने में ज़्यादा रुचि नहीं थी, लेकिन उनके निरंतर प्रयासों से अब कई बच्चे उनकी क्लास से जुड़ गए हैं.

पढ़ाई में उनकी रुचि भी बढ़ गई है. संध्या अलग-अलग सबजेक्ट की पढ़ाई के अलावा बच्चों को लोक नृत्य और संगीत भी सिखाती हैं.

उनका मानना है कि गांव के बच्चे प्राथमिक या मिडिल स्कूल की पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ देते हैं, क्योंकि ज्यादातर परिवार बच्चों को स्कूल भेजने का ख़र्च नहीं उठा पाते.

शायद यही वजह है कि संध्या ही गांव की पहली और इकतौली ग्रैजुएट हैं.

संध्या सभी विषयों की नियमित क्लास लेती हैं. गांव में एक प्राथमिक स्तर का स्कूल ज़रूर है, और सरकार ने इसमें सभी सुविधाएं भी मुहैया कराई है. लेकिन जागरुकता की कमी के चलते गांव में कई स्कूल ड्रॉपआउट हैं.

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