आदिवासी आबादी में कैसे बढ़े पहुँच, बीजेपी अध्यक्ष की नेताओं से चर्चा

इस साल के अंत तक गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधान सभा चुनाव होंगे. इन दोनों ही राज्यों में आदिवासी आबादी चुनाव की नज़र काफ़ी अहमियत रखती है. ख़ासतौर से गुजरात में कुल आबादी का कम से कम 16 प्रतिशत आदिवासी है.

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को अपनी पार्टी के आदिवासी नेताओं के साथ बैठक की है. इस बैठक में बीजेपी के आदिवासी नेताओं के अलावा केंद्र और राज्यों में आदिवासी मंत्री भी शामिल हुए.

आदिवासी नेताओं के साथ बैठक में अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा पार्टी महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी शामिल रहे. इस बैठक का मक़सद बीजेपी की पहुँच आदिवासी आबादी और इलाक़ों में बढ़ाना बताया गया है.

इस साल के अंत तक गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधान सभा चुनाव होंगे. इन दोनों ही राज्यों में आदिवासी आबादी चुनाव की नज़र काफ़ी अहमियत रखती है. ख़ासतौर से गुजरात में कुल आबादी का कम से कम 16 प्रतिशत आदिवासी है.

गुजरात में कुल 182 विधान सभा सीट हैं जिनमें से 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. गुजरात में कम से कम 14 ज़िलों में आदिवासी आबादी है. 

इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव की दृष्टि से आदिवासी आबादी में पकड़ बेहद ज़रूरी मानी जाती है. इन राज्यों में भी अगले साल यानि 2023 में विधान सभा के चुनाव होंगे.

पिछले कई महीने से बीजेपी ने इन सभी राज्यों में आदिवासी इलाक़ों और आबादी पर काफ़ी ध्यान दिया है. मध्य प्रदेश और गुजरात में बीजेपी की राज्य सरकारें हैं. इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी सरकारें आदिवासी आबादी के लिए की तरह की घोषणाएँ कर रही हैं.

मसलन हाल ही में गुजरात सरकार ने आदिवासियों को बीज और खाद के मूल्य में छूट दी है. उधर मध्य प्रदेश ने पेसा क़ानून लागू करने की घोषणा की है.

बीजेपी ने आदिवासी आबादी में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अलावा पार्टी के सभी बड़े नेताओं को उतार दिया है.

कल की बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, महासचिव बीएल संतोष के साथ वी सतीश, आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा, दिलीप सैकिया और फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हुए.

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