ममता को आदिवासियों की ज़मीन नहीं लूटने देंगे – बीजेपी

इस प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री कोयला खादान के लिए ग़ैर कानूनी काम कर रही हैं. उन्होंने काह कि कोयला खादान के लिए आदिवासियों की सहमति के विरूद्ध उनकी ज़मीन अधिग्रहित नहीं की जा सकती है.

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पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में कोयला खादान परियोजना को रद्द करने की मांग के साथ आदिवासियों ने मोर्चा निकाला है. गुरूवार को यह इस सिलसिले में एक मार्च निकाला गया. 

इस मार्च का नेतृत्व राज्य की विधान सभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने किया. उऩके साथ बीजेपी के राज्य इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी शामिल थे.

इससे पहले भी बीरभूम ज़िले में कोयला खादान देउचा पचामी का विररोध करते हुए आदिवासी बड़ा प्रदर्शन कर चुके हैं.

इस प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री कोयला खादान के लिए ग़ैर कानूनी काम कर रही हैं. उन्होंने काह कि कोयला खादान के लिए आदिवासियों की सहमति के विरूद्ध उनकी ज़मीन अधिग्रहित नहीं की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण क़ानून के तहत जमीन के मालिक की मर्जी के खिलाफ़ जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ज़बरदस्ती आदिवासियों की ज़मीन नहीं ले सकती हैं.

बीजेपी के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि ममता बनर्जी आदिवासियों की ज़मीन और घर ज़बरदस्ती छीन रही हैं. वो आदिवासियों की ज़मीन छीन कर बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों को दे रही हैं. हम ऐसा हरगिज़ नहीं होने देंगे.

पिछले तीन महीने से बीरभूम में लगातार ज़मीन अधिग्रहण के खिलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं. यहां पर आदिवासी संगठन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगा रहे हैं कि वो उद्योगपतियों के साथ खड़ी हैं.

बीजेपी लगातार इस विरोध आंदोलन का समर्थन कर रही है. इससे पहले भी नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी इस आंदोलन के समर्थन में बयान दे चुके हैं.

ममता बनर्जी के लिए यह मसला राजनीतिक शुचिता और प्रतिष्ठा दोनों का बन गया है. एक तरफ उनके सामने अपना फैसला लागू कराने की चुनौती है. 

क्योंकि उनकी पार्टी के लोग और सरकार के अधिकारी कई बार इस इलाके में आदिवासियों को ज़मीन देने के लिए समझाने का प्रयास कर चुके हैं.

लेकिन हर बार उन्हें आदिवासियों का विरोध झेलना पड़ा है. 

वहीं ममता बनर्जी के सामने राजनीतिक शुचिता का भी प्रश्न है. क्योंकि ममता बनर्जी खुद ज़मीन अधिग्रहण का विरोध करके ही पश्चिम बंगाल की सत्ता में पहुंची हैं.

जब वामपंथी सरकार ने राज्य में उद्योग लगाने के लिए टाटा को सिंगुर में और केमिकल प्लांट के लिए नंदीग्राम में ज़मीन का अधिग्रहण किया था, उस समय ममता बनर्जी ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था.

इसके बाद ममता बनर्जी राज्य में वामपंथी सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने में कामयाब रही थीं. आज समय के चक्र के साथ ज़मीन अधिग्रहण का मसला उनके ही सामने खड़ा हो गया है. 

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