केरल विधानसभा चुनाव: राज्य की पहली आदिवासी पंचायत में चुनाव प्रक्रिया तीन दिन तक चलती है

मुन्नार फ़ॉरेस्ट डिविज़न के अंदर स्थित इस पंचायत से मतदान अधिकारी बुधवार को ही ईवीएम लेकर निकलेंगे. देरी की वजह है जंगल के अदर जंगली जानवरों की आवाजाही, जो रात में ज़्यादा एक्टिव रहते हैं.

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आज के मतदान के बाद इस्तेमाल की गई ईवीएम को जब स्ट्रॉन्गरूम में शिफ़्ट कर दिया जाएगा, तो केरल के इडुक्की ज़िले की एडमलक्कुडी पंचायत के तीन बूथों के ईवीएम उस शिफ़्टिंग में शामिल नहीं होंगे.

मुन्नार फ़ॉरेस्ट डिविज़न के अंदर स्थित इस पंचायत से मतदान अधिकारी बुधवार को ही ईवीएम लेकर निकलेंगे. देरी की वजह है जंगल के अदर जंगली जानवरों की आवाजाही, जो रात में ज़्यादा एक्टिव रहते हैं.

चुनाव अधिकारियों को इन घने जंगलों से बाहर आने के लिए 18 किलोमीटर लंबी ट्रेकिंग करनी पड़ती है.

81 मतदान अधिकारियों की टीम सोमवार सुबह 6.30 बजे मतदान सामग्री लेकर मुन्नार से एडमलक्कुडी के लिए रवाना हुई थी. चुनाव आयोग ने राज्य की पहली आदिवासी पंचायत में चार पोलिंग बूथ लगाए गए थे.

सोसायटीकुडी, परप्पयरकुडी और मूलकुदरकुडी में तीन मुख्य बूथ स्थापित किए गए, जबकि एक सहायक बूथ बनाया गया. अब चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के बाद चुनाव अधिकारी बुधवार सुबह वहां से रवाना होंगे.

इलाक़े तक पहुँचने की कठिनाई को देखते हुए एडमलक्कुडी के लिए अतिरिक्त ईवीएम प्रदान किए गए. वहां तैनात पुलिस अधिकारियों के वायरलेस सेट भी दिए गए, क्योंकि वहां कम्युनिकेशन नेटवर्क काफ़ी ख़राब है.

इस पंचायत क्षेत्र के घने जंगलों के अंदर होने की वजह से उम्मीदवार भी आमतौर पर प्रचार के दौरान यहां मतदाताओं तक नहीं पहुंचते हैं. इस पंचायत के 2010 में बनने के बाद एडमलक्कुडी में यह तीसरा विधानसभा चुनाव है.

यह पंचायत विशेष रूप से मुतुवान जनजाति के लोगों के लिए बनाई गई थी.

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