एक लाख नई नौकरी देने वाली सरकार, पहले आदिवासियों के लिए खाली पड़े पद तो भरे

असम सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि राज्य के 1 लाख बेरोजगार युवाओं को 31 मार्च, 2022 तक सरकारी नौकरी मिल जाएगी. वहीं 1 लाख सरकारी नौकरी देने से पहले, सरकार को पहले अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरना चाहिए.

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असम के जनजातीय संगठनों (CCTOA) की समन्वय समिति ने राज्य सरकार से राज्य के 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने से पहले कई विभागों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने की मांग की है.

गुवाहाटी में सोमवार को सीसीटीओए की बैठक हुई जिसमें आदिवासी लोगों के कल्याण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. ये बैठक अखिल असम आदिवासी संघ (AATS) के अध्यक्ष सुकुमार बसुमतारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी.

उन्होंने कहा, “असम भूमि और राजस्व विनियमन, 1886 के अध्याय X के प्रावधानों के तहत, कैबिनेट ने तिनसुकिया में सादिया आदिवासी बेल्ट में रहने वाले अहोम, मोरन, मटॉक, चुटिया और गोरखा लोगों को संरक्षित वर्ग घोषित करने का फैसला किया. हालांकि, अधिसूचना में कट-ऑफ साल का उल्लेख नहीं किया गया है.”

खखलारी ने कहा, “सादिया आदिवासी बेल्ट 13 मार्च, 1951 को घोषित किए गए थे. बैठक में हमने यह मांग करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया कि 13 मार्च, 1951 को कट-ऑफ तारीख के रूप में लिया जाना चाहिए और सिर्फ उन लोगों को उस तारीख से पहले सादिया आदिवासी इलाकों में रहने वाले पांच समुदायों को ‘संरक्षित वर्ग’ घोषित किया जाना चाहिए.”

राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि राज्य के 1 लाख बेरोजगार युवाओं को 31 मार्च, 2022 तक सरकारी नौकरी मिल जाएगी. वहीं 1 लाख सरकारी नौकरी देने से पहले, सरकार को पहले अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरना चाहिए.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 59 सरकारी विभागों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 12,155 पद खाली हैं. उन्होंने कहा, “सरकार को इन बैकलॉग पदों को भरने के लिए कदम उठाने चाहिए और इन पदों को भरने के लिए मानदंड भी निर्धारित करने चाहिए.”

खखलारी ने आगे कहा कि सरकार को 1 लाख बेरोजगार युवाओं को नौकरी देते हुए आरक्षण नियमों का पालन करना चाहिए और एसटी के लिए नौकरी आरक्षित करनी चाहिए.

वहीं सीसीटीओए के मुख्य समन्वयक ने ड्रग्स के खिलाफ राज्य सरकार के अभियान का स्वागत किया.

साथ ही उन्होंने आगाह किया कि पुलिस और एक्साइज डिपार्टमेंट को नशा मुक्त समाज के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अवैध साधनों का सहारा लेने से बचना चाहिए.

खाखलारी ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी के नाम पर पुलिस और एक्साइज डिपार्टमेंट के कर्मी आदिवासियों को परेशान कर रहे हैं और उनकी संपत्ति को भी नष्ट कर रहे हैं.

इस संबंध में उन्होंने कहा कि सीसीटीओए ने महिला कांस्टेबल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. जिसने हाल ही में एक महिला अवैध शराब विक्रेता को सार्वजनिक रूप से धोखा दिया और उसके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया.

खाखलरी ने आदम कायापानी नाम की एक महिला का जिक्र किया, जिसके पास सोनापुर राजस्व सर्कल के तहत दक्षिण कामरूप आदिवासी बेल्ट के झोरुतारी गांव में 33 बीघा जमीन थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर दो व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था और उन्होंने उस जमीन पर एक उद्योग स्थापित किया था.

उन्होंने मांग की कि अतिक्रमित जमीन को उसके असली मालिक को लौटाया जाए. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. सीसीटीओए ने विभिन्न जिलों के उपायुक्तों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि छात्रों को अपने एसटी प्रमाण पत्र प्राप्त करने में किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े.

सीसीटीओए ने यह भी मांग की है कि एसटी उम्मीदवारों के लिए विशेष टीईटी आयोजित की जानी चाहिए.

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