अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति पर अत्याचार के खिलाफ आज से शुरू होगी राष्ट्रीय हेल्पलाइन

सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि हर एक शिकायत को प्राथमिकी के रूप में दर्ज किया जाए, राहत प्रदान की जाए, सभी पंजीकृत शिकायतों की जांच की जाए और दायर किए गए सभी आरोपपत्रों पर निर्णय के लिए सभी अधिनियम में दी गई समय-सीमा के भीतर अदालतों में मुकदमा चलाया जाए.

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्यों पर अत्याचार को रोकने के लिए 13 दिसंबर यानि आज से एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन (NHAA) शुरू करेगा.

सरकार भेदभाव को खत्म करने और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य राष्ट्रीय हेल्पलाइन शुरू करेगी.

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हेल्पलाइन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) (POA) अधिनियम, 1989 के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगी.

मंत्रालय ने कहा कि एनएचएए हेल्पलाइन पूरे देश में टोल-फ्री नंबर 14566 पर चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा. नागरिक देश भर में किसी भी दूरसंचार ऑपरेटर के मोबाइल या लैंडलाइन नंबर से वॉयस कॉल/वीओआइपी करके इसे एक्सेस कर सकेंगे.

विज्ञप्ति से पता चला कि यह सेवा हिंदी, अंग्रेजी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध होगी. इसका मोबाइल एप्लिकेशन भी उपलब्ध होगा. विज्ञप्ति के मुताबिक हेल्पलाइन का उद्देश्य कानून के प्रावधानों के बारे में जागरूक जागरूकता पैदा करना है जिसका उद्देश्य भेदभाव को समाप्त करना और सभी को सुरक्षा प्रदान करना है.

सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि हर एक शिकायत को प्राथमिकी के रूप में दर्ज किया जाए, राहत प्रदान की जाए, सभी पंजीकृत शिकायतों की जांच की जाए और दायर किए गए सभी आरोपपत्रों पर निर्णय के लिए सभी अधिनियम में दी गई समय-सीमा के भीतर अदालतों में मुकदमा चलाया जाए.

वेब-आधारित स्वयं-सेवा पोर्टल के रूप में भी उपलब्ध, NHAA नागरिक अधिकारों के संरक्षण (PCR) अधिनियम, 1955 और इसके नियमों के बारे में भी जागरूकता पैदा करेगा.

पीओए अधिनियम, 1989 और पीसीआर अधिनियम, 1955 के गैर-अनुपालन के संबंध में पीड़ित/शिकायतकर्ता/ गैर सरकारी संगठनों से प्राप्त हर एक शिकायत के लिए एक डॉकेट नंबर दिया जाएगा. शिकायत की स्थिति को शिकायतकर्ताओं/एनजीओ द्वारा ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता है.

मंत्रालय ने कहा कि किसी भी पूछताछ का जवाब आईवीआर या ऑपरेटरों द्वारा हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में दिया जाएगा. यह हेल्पलाइन संपर्क के एकल बिंदु की अवधारणा को अपनाएगी और इसमें एक उचित प्रतिक्रिया प्रणाली होगी.

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