खम्मम: गरीबी के दलदल में फंसे आदिवासी युवा इस खेल में कर रहे हैं बेहतरीन प्रदर्शन

2015 से खेल खेलते हुए युवाओं ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की आयोजनों में शानदार प्रदर्शन किया और पदक जीते. अनीता जो कि एक डिफेंडर है और नौ राष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेली है. वहीं संगममित्रा भी एक डिफेंडर और छह राष्ट्रीय मैच खेले है. जबकि विनय जो एक गोलकीपर है और आठ राष्ट्रीय मैच खेले है.

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कई मुश्किलों को पार करते हुए खम्मम जिले के दूरस्थ एजेंसी गांवों के तीन आदिवासी युवा एक नए खेल, टारगेटबॉल में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. जो हाल के दिनों में लोकप्रियता हासिल कर रहा है.

बोदानल्ली के इरपा अनीता, पुसुगुप्पा के सोदी साई विनय और चेरला मंडल के कोय्युरु के इरपा संघमित्रा ने फरवरी, 2022 में बांग्लादेश के ढाका में दक्षिण एशियाई टारगेटबॉल एसोसिएशन द्वारा आयोजित होने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय टारगेटबॉल टूर्नामेंट में खेलने के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई है.

अनीता भारतीय महिला टीम का हिस्सा होंगी. जबकि विनय और संघमित्रा 12 सदस्यीय पुरुष टीम का हिस्सा होंगे. कोच ए. ईश्वर जो चेरला के उंजुपल्ले आश्रम स्कूल में एक फिजिकल डायरेक्टर है, ने तेलंगाना टुडे को ये जानकारी दी.

उन्होंने कहा, “टारगेटबॉल एक भारतीय खेल है जिसे आधिकारिक तौर पर 2012 से खेला जाता है. इस खेल को स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) द्वारा मान्यता दी गई है, जिसने कई राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं”.

2015 से खेल खेलते हुए युवाओं ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की आयोजनों में शानदार प्रदर्शन किया और पदक जीते. अनीता जो कि एक डिफेंडर है और नौ राष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेली है. वहीं संगममित्रा भी एक डिफेंडर और छह राष्ट्रीय मैच खेले है. जबकि विनय जो एक गोलकीपर है और आठ राष्ट्रीय मैच खेले है.

कोच ने कहा कि पिछले साल उन्हें श्रीलंका में एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए चुना गया था. लेकिन कोविड-19 संकट के चलते कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था. बांग्लादेश में टूर्नामेंट इन तीनों  खिलाड़ियों के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय आयोजन है और उम्मीद है कि वे इस आयोजन में भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे.

ए. ईश्वर ने कहा कि चेरला खिलाड़ी देश के शीर्ष छह टारगेटबॉल खिलाड़ियों में शामिल हैं. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जाने वाला खेल अभी भी काफी हद तक अज्ञात है और इसे भारत में युवाओं के बीच प्रचारित करने की जरूरत है.

उन्होंने आगे कहा कि एक खेल कोच इरपा रवि ने 2015 में जिले में इस खेल की शुरुआत की थी. जिला और राज्य स्तर पर टारगेटबॉल एसोसिएशन नियमित अंतराल पर टूर्नामेंट आयोजित करके खेल को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहे हैं.

भले ही खिलाड़ियों ने खेल में दमदार प्रदर्शन किया. लेकिन खिलाड़ियों को बांग्लादेश टूर्नामेंट में भाग लेने और अपने खर्चों को पूरा करने के लिए स्पॉनशर और दाताओं की तलाश करने के लिए वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वे अब कुछ पैसे कमाने के लिए अपने खाली समय में मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं.

अपने खाली समय में धान के खेतों में खेत मजदूर के रूप में काम करने वाली अनीता ने कहा, “मुझे ज़रूरतमंदों की सहायता करने वाले लोगों के समर्थन की आवश्यकता है क्योंकि मैं एक खराब वित्तीय पृष्ठभूमि से हूं और हमारे माता-पिता मेरी बांग्लादेश यात्रा पर बड़ी रकम खर्च नहीं कर सकते हैं.”

विनय और संघमित्रा टूर्नामेंट में जाने के लिए पैसे कमाने के लिए निर्माण श्रमिक के रूप में काम कर रहे हैं. ईश्वर के मुताबिक हर एक खिलाड़ी को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 50,000 रुपये की आवश्यकता होती है और आदिवासी खिलाड़ियों के लिए इतनी राशि जुटाना करना वास्तव में कठिन है.

तेलंगाना टारगेटबॉल एसोसिएशन के महासचिव डी रेवंत ने भी दयालु दानदाताओं से खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से स्पॉनशर करने और उन्हें देश और राज्य के लिए नाम कमाने में मदद करने की अपील की है.

(तस्वीर प्रतिकात्मक है)

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