नेमावर हत्याकांड की पीड़िता की न्याय यात्रा पर रोक, राज्यपाल पर लगा आदिवासी विरोधी होने का आरोप

लड़की को राज्यपाल से नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस नेता वर्मा ने कहा, "हमें गर्व था कि एक आदिवासी व्यक्ति को मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. हमें क्या पता था कि राज्यपाल कोरोनावायरस से डरते हैं और अपने ही समुदाय को न्याय नहीं दे सकते. ऐसी जिंदगी से मौत भली."

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मध्य प्रदेश में मंगलवार को सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध तब शुरू हुआ जब विपक्षी दल के एक नेता ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल को एक लड़की से नहीं मिलने के लिए फटकार लगाई.

दरअसल राज्य के देवास जिले का नेमावर हत्याकांड फिर सुर्खियों में है. क्योंकि नेमावर के आदिवासी परिवार में मां, दो बहन, ममेरे भाई और ममेरी बहन की हत्या कर शव दफनाने के मामले में बेटी भारती कास्डे ने न्याय यात्रा निकाली. 1 जनवरी को नेमावर से शुरू हुई यात्रा 11वें दिन यानि मंगलवार को भोपाल पहुंची.

पीड़िता भारती कास्डे के पक्ष में कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल से मिलने का रुख किया. लेकिन भोपाल प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया. भोपाल प्रशासन के इस रुख का कांग्रेस पार्टी ने जमकर विरोध किया. कांग्रेस नेताओं और भोपाल प्रशासन के बीच काफी देर तक बहस भी हुई.

जिसके बाद भारती कास्डे के साथ-साथ कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल जांच की मांग को लेकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मिलने पहुंचा. साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और सज्जन सिंह वर्मा के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ राजभवन पहुंचे थे. लेकिन राज्यपाल कोविड का हवाला देकर इस प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिले. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आदिवासी समुदाय से आनेवाले राज्यपाल को भी अपने वर्ग के हितों की चिंता नहीं है.

लड़की को राज्यपाल से नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस नेता वर्मा ने कहा, “हमें गर्व था कि एक आदिवासी व्यक्ति को मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. हमें क्या पता था कि राज्यपाल कोरोनावायरस से डरते हैं और अपने ही समुदाय को न्याय नहीं दे सकते. ऐसी जिंदगी से मौत भली.”

दिग्विजय सिंह ने कहा की हमें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा. ये तरीका गलत है. अगर राज्यपाल को नहीं मिलना तो हमें कोई दिक्कत नहीं, लेकिन हम तो अंदर जाएंगे.

राजभवन के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी राज्यपाल के खिलाफ नारेबाजी की.

वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया कि कांग्रेस नेता राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं.

चौहान ने एक ट्वीट में कहा, “कांग्रेस नेता न सिर्फ धैर्य खो रहे हैं बल्कि अपनी अंतरात्मा भी खो रहे हैं. संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की क्षुद्र टिप्पणी न सिर्फ राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन है बल्कि सभी के कल्याण की कामना करने की भारतीय परंपरा का भी अपमान है. आपकी टिप्पणी है राज्य के दिल के लिए एक झटका.”

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला बोला.

वीडी शर्मा ने कहा, “कांग्रेस नेताओं दिग्विजय सिंह और सज्जन सिंह वर्मा द्वारा मध्य प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन मंगूभाई पटेल जी के खिलाफ की गई अशोभनीय और मूर्खतापूर्ण टिप्पणी निंदनीय है. आदिवासी वर्ग के प्रति कांग्रेस की नफरत अपने चरम पर है कि वे मृत्यु की कामना कर रहे हैं.”

दरअसल भारती ने अपने पांच परिजनों की हत्या के लिए न्याय की मांग करते हुए 200 किलोमीटर, 11 दिन का पैदल मार्च निकाला था.

न्याय यात्रा निकाल रही भारती ने यात्रा की शुरुआत में कहा था कि जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, यह यात्रा जारी रहेगी. हम आरोपियों को फांसी पर लटकते देखना चाहते हैं. सीबीआई जांच शुरू होने से न्याय नहीं हो जाता. सात महीने से हम भटक रहे थे. तब सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए. जब हमने यात्रा निकालने का एलान किया तो यह आदेश दिया गया.

नेमावर हत्याकांड क्या है?

29 जून, 2021 को एक खेत की खुदाई के बाद आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों के शव मिले थे. नेमावर के जिस खेत में पांच शव (1 महिला, 3 युवती और 1 युवक) मिले थे वो लोग 13 मई से ही लापता थे. पुलिस लगातार इन लोगों को ढूंढ रही थी जिसके बाद मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने खेत से इनका शव बरामद किया था. पांचों शव को खेत में बने 10 फीट गहरे गड्ढे से बरामद किया गया था.

देवास के नेमावर में हुई इस घटना को लेकर सियासत भी चरम पर थी. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी. पूरे मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को आरोपी बनाया था. इनकी गिरफ्तारी की गई थी, लेकिन घटना से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशने में पुलिस नाकाम साबित हुई.

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