ग़रीबों की मदद करने के बजाय उनका ही शोषण, वकील और उसके भाई पर आदिवासियों को बंधक बनाने का मामला दर्ज

वकील और उसके भाई ने आदिवासी भाइयों से वादा किया था कि वे उन्हें उनकी जमीन के लिए उचित मुआवजा दिलाएंगे. वे 21 जुलाई को उन्हें मामले पर चर्चा करने के नाम पर अपने घर ले आए. दोनों ने 23 सितंबर तक उन्हें बंधक बनाकर रखा.

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पुलिस ने ठाणे जिले के शाहपुर में एक वकील और उसके भाई के खिलाफ दो आदिवासियों का अपहरण करने और दो महीने तक उन्हें बंधक बनाए रखने के आरोप में एक मामला दर्ज किया है. दोनों आरोपी उनसे जमीन के मुआवजे के तौर पर मिली धनराशि का एक हिस्सा देने की मांग कर रहे थे.

एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि आरोपियों की पहचान मुरबाद तहसील के खानिवारे गांव के वकील विठ्ठल देसले और उसके भाई धनाजी देसले के रूप में की गयी है. आरोपी अभी फरार हैं.

शाहपुर में पोकल्याची वाडी के दो आदिवासी भाइयों ने दोनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी. शिकायत में कहा गया है कि पीड़ितों की जमीन का सरकार ने एक बांध परियोजना के लिए अधिग्रहण कर लिया था.

वकील और उसके भाई ने आदिवासी भाइयों से वादा किया था कि वे उन्हें उनकी जमीन के लिए उचित मुआवजा दिलाएंगे. वे 21 जुलाई को उन्हें मामले पर चर्चा करने के नाम पर अपने घर ले आए. दोनों ने 23 सितंबर तक उन्हें बंधक बनाकर रखा.

शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने आदिवासी भाइयों से उन्हें मिलने वाले मुआवजे की 60 फीसदी धनराशि देने को कहा. उन्होंने पीड़ितों को धमकी दी कि अगर उन्होंने पुलिस के पास जाने की कोशिश की तो उन्हें मार दिया जाएगा.

23 सितंबर को आरोपी पीड़ितों को पंजीयक कार्यालय लाए और उनसे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा लेकिन दोनों ने इससे इनकार कर दिया. उस समय पीड़ितों के परिवार के सदस्यों ने उन्हें छुड़ा लिया. पुलिस ने कहा कि छह दिन बाद उन्होंने शिकायत दर्ज करायी.

किन्हावली थाने में आरोपियों पर आईपीसी की धारा 356 (गुप्त रूप से और गलत तरीके से व्यक्ति को बंधक बनाने के इरादे से अपहरण या अपहरण), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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