दिल्ली में नेशनल ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट के लिए ज़मीन क्यों नहीं मिल रही है

मंत्रालय का कहना है कि जब तक ज़मीन का आवंटन नहीं हो जाता है तब तक इस इंस्टिट्यूट को किराये की बिल्डिंग से ही चलाया जा सकता है.

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जनजातीय कार्य मंत्रालय दिल्ली में एक नेशनल ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट की स्थापना करना चाहता है. यह संस्थान दिल्ली में स्थापित करने की योजना है. लेकिन इस इंस्टिट्यूट के लिए अभी तक ज़मीन का आवंटन नहीं हुआ है. 

मंत्रालय का कहना है कि जब तक ज़मीन का आवंटन नहीं हो जाता है तब तक इस इंस्टिट्यूट को किराये की बिल्डिंग से ही चलाया जा सकता है.

मंत्रालय इस संस्थान को आईआईपीएम यानि भारतीय लोक प्रशासन की बिल्डिंग में बनाने की योजना पर काम कर रहा है.

सरकार का कहना है कि दिल्ली में नेशनल ट्राइबल इंस्टिट्यूट स्थापित करने के लिए उत्तराखंड के ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूट को प्रस्ताव तैयार करने की ज़िम्मेदारी दी है.

टीआरआई, उत्तराखंड इस इंस्टिट्यूट में आने वाले ख़र्च और दूसरी ज़रूरतों पर एक प्रस्ताव तैयार कर जनजातीय मंत्रालय को देगा. 

मंत्रालय ने राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में कहा है कि यह राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान सरकार के लिए थिंक टैंक का काम करेगा.

इसके अलावा यह संस्थान अलग अलग राज्यों में चल रहे ट्राइबल रिसर्च इंस्टिट्यूटस के बीच तालमेल का काम भी देखेगा. 

नेशनल ट्राइबल इंस्टिट्यूट ट्राइबल नॉलेज, आदिवासी जागरूकता, रिसर्च, ट्रेनिंग और विरासत के रख-रखाव पर काम करेगा. 

यह जानकारी जनजातीय कार्य राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने एक लिखित जवाब में दी है.

दरअसल राज्य सभा के सांसद प्रशांत नंदा ने एक लिखित सवाल में यह पूछा था कि क्या सरकार की ऐसी कोई योजना है. उन्होंने यह भी पूछा था कि इस इंस्टिट्यूट की स्थापना कहां की जाएगी.

हालाँकि सराकर के जवाब में यह स्पष्ट नहीं है कि अभी तक इस इंस्टिट्यूट को ज़मीन क्यों नहीं मिली है या फिर कब तक इस संस्थान के लिए ज़मीन मिल सकती है.

इसके अलावा यह भी नहीं बताया गया है कि इस संस्थान को ज़मीन मिलने में बाधा क्यों और क्या आ रही है. नेशनल ट्राइबल इंस्टिट्यूट कब तक तैयार हो जाएगा, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई है.

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