ओडिशा: करीब 16,000 आदिवासी छात्रों ने पिछले कुछ सालों में छोड़ी पढ़ाई

कालाहांडी जिले में 2,086 एसटी और 905 एससी छात्रों समेत सबसे ज्यादा 6,731 छात्रों ने, और कोरापुट में 3,587 (1,821 एसटी और 618 एससी) ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.

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पिछले कुछ सालों में ओडिशा में 49,098 मिडिल स्कूल के छात्र हायर सेकेंडरी तक पहुंचने से पहले ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुए हैं. इनमें 15,792 आदिवासी और 11,045 अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र हैं.

स्कूल और जन शिक्षा मंत्री समीर रंजन दास ने विधानसभा में दिए एक बयान में कहा कि कालाहांडी जिले में 2,086 एसटी और 905 एससी छात्रों समेत सबसे ज्यादा 6,731 छात्रों ने, और कोरापुट में 3,587 (1,821 एसटी और 618 एससी) ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.

सात आदिवासियों समेत सबसे कम 13 छात्र मयूरभंज जिले में मिडिल से हाई सेकेंडरी स्टार पर नहीं पहुंचे, और कटक जिले में एक आदिवासी छात्र समेत 19 छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी.तटीय जिलों में गंजम में 2,363, भद्रक में 1,822, खुर्दा में 1,734, बालासोर में 1,592, जगतसिंहपुर में 1,364 और पुरी में 1,255 छात्र पढ़ाई छोड़ चुके हैं.

सुंदरगढ़ में 3,426 छात्र और अंगुल में 2,715 छात्र बाहर हो गए. इसी तरह बारगढ़ में 2,679, नुआपाड़ा में 2,350, मलकानगिरी में 2,020 और क्योंझर में 2,011 छात्रों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.

मंत्री ने बताया कि पिछले साल मार्च में कोविड-19 महामारी के चलते शैक्षणिक संस्थानों के बंद किए जाने के बाद राज्य में 8,168 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया.

नुआपाड़ा जिले में सबसे ज्यादा 896 छात्र स्कूल छोड़ गए, इसके बाद क्योंझर में 681 और खुर्दा में 603 छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी.

उन्होंने विधानसभा में कहा, “जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) और पीडी डीआरडीए को शैक्षणिक संस्थानों में ड्रॉपआउट लिए छात्रों को स्कूल वापस लाने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत योजनाओं को लागू करने के लिए कहा गया है.”

दास ने कहा कि ओडिशा में स्कूल छोड़ने की दर 16.06 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 16.1 फीसदी है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महामारी के दौरान पहली से दसवीं कक्षा तक के लगभग 33.52 प्रतिशत छात्रों को Youtube के माध्यम से शिक्षा प्रदान की थी.

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