अट्टपाड़ी के आदिवासी बच्चे अब कर सकेंगे अपनी ही भाषा में पढ़ाई

उमा प्रेमन ने दसवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए तमिल में कंटेंट तैयार किया है, जबकि इरुला भाषा में कंटेंट चौथी कक्षा तक के लिए है. चैनल को 6 अक्टूबर को लॉन्च करने का प्लान है. शुरुआत में, सातवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए तमिल में प्रसारण होगा, और इरुला में चौथी कक्षा तक के लिए.

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केरल के अट्टपाड़ी में दूरदराज़ की बस्तियों में रहने वाले आदिवासी छात्र जो अपने स्मार्टफ़ोन पर ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लेने के लिए कभी पेड़ों पर चढ़ते थे, तो कभी मीलों पैदल चलकर सिग्नल ढूंढते थे, अब अपनी ही इरुला भाषा में ऐसा कर सकते हैं. वो भी अपने घरों पर बैठकर.

इरुला आदिवासी भाषा में क्लास का प्रसारण एक स्थानीय केबल टेलीविज़न चैनल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा छात्र बिना किसी रुकावट के कक्षाओं में भाग ले सकेंगे.

196 आदिवासी बस्तियों के कई आदिवासी छात्र लंबे समय से ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने मोबाइल फ़ोन पर सिग्नल नहीं मिलता.

चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर बसिल पी दास ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब इस साल जून में स्कूल फिर से ऑनलाइन मोड में खुला, तो इलाक़े की सामाजिक कार्यकर्ता उमा प्रेमन, जो अट्टपाड़ी में चौथी कक्षा के छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल ट्राइबल रेज़िडेंशियल स्कूल चलाती हैं, ने मुझे मोबाइल फ़ोन कनेक्टिविटी की कमी की बात उठाई. मैंने उनसे कहा कि मेरा एक स्थानीय टीवी चैनल है जिसे एक दशक पहले वित्तीय समस्याओं की वजह से बंद करना पड़ा था. अगर यह बंद नहीं हुआ होता, तो कक्षाओं का प्रसारण इसपर किया जा सकता था. तब उमा ने सुझाया कि चैनल को फिर से लॉन्च किया जाए, और उसके लिए कंटेंट वो तैयार करेंगी. इसके बाद मैंने अट्टपाड़ी टेलीविजन चैनल (एटीवी) लॉन्च किया.”

उमा प्रेमन ने दसवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए तमिल में कंटेंट तैयार किया है, जबकि इरुला भाषा में कंटेंट चौथी कक्षा तक के लिए है. चैनल को 6 अक्टूबर को लॉन्च करने का प्लान है. शुरुआत में, सातवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए तमिल में प्रसारण होगा और इरुला में चौथी कक्षा तक के लिए.

चूंकि अट्टपाड़ी में 196 आदिवासी बस्तियों में से 120 में केबल कनेक्शन है, चैनल लॉन्च होने के बाद आदिवासी छात्रों मोबाइल कनेक्टिविटी पर निर्भर होने की ज़रूरत नहीं होगी.

इसके अलावा आदिवासियों को अख़बार पढ़ने या ख़बरें सुनने की भी आदत नहीं है. इसलिए योजना है कि इरुला भाषा में सुबह और शाम को दिन में दो बार अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य समाचारों को कवर करता हुआ एक समाचार बुलेटिन भी पेश किया जाएगा. स्थानीय समाचार मलयालम भाषा में भी प्रसारित होंगे.

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