कोंडा रेड्डी समुदाय की चिकित्सा ज़रूरतों को पूरा करता एक आदिवासी डॉक्टर

उन्होंने कभी किसी का इलाज करने से मना नहीं किया, चाहे रोगी के गांव या बस्ती तक पहुंचना कितना भी मुश्किल हो. भगवान मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं, क्योंकि माओवादियों की वजह से पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क टावर नहीं लगाए गए हैं.

0
610

आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा से लगे माओवादी क्षेत्र के अंदर की चिकित्सा ज़रूरतों को पूरा करते हैं बगाटा आदिवासी समुदाय के एक डॉक्टर, कोर्रा भगवान. तेज़ बारिश हो, या कड़कती धूप कोर्रा भगवान घने जंगलों में कठिन यात्रा से नहीं कतराते.

उनका एक ही मिशन है – यह सुनिश्चित करना कि इलाक़े के सबसे दूरदराज़ और दुर्गम गांवों में रहने वाले आदिवासियों को उनकी ज़रूरत के आधार पर इलाज मिले.

कई साल पहले अरकू घाटी छोड़ने वाले भगवान पिछले एक दशक से आयुर्वेद का अभ्यास कर रहे हैं. वो अपने पारंपरिक औषधीय ज्ञान के लिए इलाक़े में मशहूर हैं. भगवान विशाखा एजेंसी में कोय्यूरु मंडल के गोडुगु मामिदी गांव में रहतो हैं.

कोर्रा भगवान ने एक सरल प्रणाली इजाद की है. जब भी वो किसी के इलाज के लिए कहीं जाते हैं, तो आसपास के गावों से आदिवासी उनसे मिलने आ जाते हैं.

उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी का इलाज करने से मना नहीं किया, चाहे रोगी के गांव या बस्ती तक पहुंचना कितना भी मुश्किल हो. भगवान मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं, क्योंकि माओवादियों की वजह से पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क टावर नहीं लगाए गए हैं.

कोर्रा भगवान ज़्यादातर कोंडा रेड्डी आदिवासी समुदाय का इलाज करते हैं. यह समुदाय पूर्वी गोदावरी एजेंसी इलाक़े में मारेदुमिली-गुरतेदु रोड पर चेतलावड़ा, पूजारीपाका, पांडिरिकोटा, एटुकुरु और कुडुरु के पांच गांवों में 10 कीमी एरिया में फैले जंगलों के अदर की पहाड़ियों में रहता है.

यह आदिवासी डॉक्टर पेट दर्द और बुखार सहित छोटी-मोटी बीमारी का इलाज करते हैं. इसके लिए वो सिर्फ़ कुछ आयुर्वेदिक दवाओं का ही इस्तमाल करते हैं. यह आयुर्वेदिक दवाएं बनाने के लिए जड़ी-बूटियां और जड़ों को इकट्ठा करने का काम वो ख़ुद ही करते हैं.

कोर्रा भगवान इलाज के लिए फ़ीस तुरंत नहीं मांगते हैं. वो मरीजों को फ़सल कटने के बाद भी भुगतान करने की अनुमति देते हैं. सबसे ज़्यादा फ़ीम 500 रुपए है, जिसमें पूरे एक दिन का इलाज और उपचार के बाद की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए रात को रुकना शामिल है.

डॉक्टरी के अलावा कोर्रा भगवान खेती से अपनी आजीविका कमाते हैं. वो तेलुगु और उड़िया दोनों अच्छे से बोलते–समझते हैं.

इन दूरदराज़ के आदिवासी इलाक़ों में कई बार एलोपैथिक डॉक्टर जाने से मना कर देते हैं. दुर्गम पहाड़ी रास्ते और माओवादियों का डर उन्हें आदिवासी बस्तियों से दूर रखता है.

इन हालात में कोर्रा भगवान जैसे चिकित्सक आदिवासियों के लिए एक बड़े आशीर्वाद की तरह हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here