झारखंड: पेड़ काटने पर आदिवासी शख्स की पीट-पीट कर हत्या

कोलेबिरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी रामेश्वर भगत ने कहा कि शुरुआती जांच में हमें जानकारी मिली है कि उनके साथी ग्रामीणों के एक वर्ग ने उनके खिलाफ वन विभाग में अवैध रूप से पेड़ काटने की शिकायत की थी. वे इस बात से नाराज थे कि प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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हाल ही में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाने वाले झारखंड में एक बार फिर से भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए ऐसी ही घटना को अंजाम दिया है. झारखंड के सिमडेगा जिले के एक गांव में पेड़ काटने और लकड़ी चोरी करने के संदेह में भीड़ ने मंगलवार को एक आदिवासी व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी.

पीड़ित की उम्र 30 वर्ष थी और उसकी पहचान संजू प्रधान के रूप में हुई है. मंगलवार दोपहर करीब दो बजे कोलेबिरा थाना क्षेत्र के बेसराबाजार गांव में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में उसकी हत्या कर दी गई.

ग्रामीणों की मानें तो संजू प्रधान आए दिन जंगल से पेड़ों की कटाई करता था, जिससे ग्रामीण काफी नाराज चल रहे थे. उसे कई बार पेड़ों की कटाई करने से मना भी किया गया था. बावजूद उसने अपना कटाई का काम जारी रखा. घटना से पहले गांव में बैठक कर संजू को सबक सिखाने का निर्णय लिया गया. जिसके बाद संजू के घर जाकर उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और फिर उसे घायल अवस्था में जलाकर मार दिया गया.

कोलेबिरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी रामेश्वर भगत ने कहा, “प्रारंभिक जांच के मुताबिक, घटना के समय लगभग 500 ग्रामीण मौजूद थे. हमने संजू प्रधान का आधा जला हुआ शव बरामद किया है, जिसकी आपराधिक पृष्ठभूमि थी. उसके खिलाफ माओवादियों के साथ संबंध के लिए तीन मामले दर्ज थे और इन मामलों के सिलसिले में वह जेल जा चुका था.”

अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. गांव में तनाव की स्थिति है और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

भगत ने कहा, “शुरुआती जांच में हमें जानकारी मिली है कि उनके साथी ग्रामीणों के एक वर्ग ने उनके खिलाफ वन विभाग में अवैध रूप से पेड़ काटने की शिकायत की थी. वे इस बात से नाराज थे कि प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.”

उन्होंने कहा, “वे नहीं चाहते थे कि पेड़ों की कटाई जारी रहे इसलिए पिछले साल जुलाई में जिले के वन विभाग के साथ एक बैठक हुई थी. एक ग्राम सभा आयोजित की गई और निर्णय लिया गया कि प्रधान पेड़ नहीं काटेंगे. क्योंकि यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है.”

भगत ने कहा, “फिर से एक बैठक बुलाई गई, लेकिन प्रधान नहीं आया. इस पर ग्रामीणों की गुस्साई भीड़ उसे बेसराजारा इलाके में ले आई और उसे पीट-पीट कर मार डाला. उन्होंने उसके शरीर को भी आग के हवाले कर दिया. सूचना मिलने के बाद हम मौके पर पहुंचे. हम ग्रामीणों से बातचीत के बाद ही वहां पहुंच पाए.”

वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सिमडेगा जिला प्रशासन को लिंचिंग में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए.

पिछले महीने ही झारखंड विधानसभा द्वारा भीड़ हिंसा और मॉब लिंचिंग विधेयक, 2021 को पारित करने के एक पखवाड़े बाद राज्य में लिंचिंग की यह दूसरी घटना है, जिसका उद्देश्य संवैधानिक अधिकारों की “प्रभावी सुरक्षा” प्रदान करना और राज्य में भीड़ की हिंसा को रोकना है.

बिल में ऐसी घटना को अंजाम देने तथा दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है. पहले भी झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटनाएं होती रही हैं. हालांकि, राज्य में एंटी मॉब लिंचिंग बिल पारित होने के बाद यह पहला मामला है. जिसमें भीड़ द्वारा एक निहत्थे व्यक्ति को पहले पीट-पीटकर अधमरा कर दिया जाता है और फिर उसे जला दिया जाता है.

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