एडेसमेटा एनकाउंटर रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग को लेकर आदिवासी बीजापुर के जंगलों में कर रहे प्रदर्शन

बस्तर की आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी भी बुधवार को मौके पर पहुंची और अपना समर्थन व्यक्त किया. सोरी ने कहा कि हम निर्दोष आदिवासियों की हत्या के आरोपी सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी की मांग कर रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बार फिर ग्रामीणों का आंदोलन शुरू हो गया है. पुलिस ने कहा कि करीब 200 आदिवासी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले के जंगलों में 9 अक्टूबर से एडसमेटा एनकाउंटर की न्यायिक जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और मुआवजे की मांग कर रहे हैं. धरना प्रदर्शन जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के पुस्नार गांव के पास किया जा रहा है.

दरअसल 17-18 मई 2013 की रात में बीजापुर जिले के एडसमेटा गांव में ग्रामीण बीज पंडुम मनाने इकठ्ठा हुए थे. नक्सल ऑपरेशन में निकले जवानों ने ग्रामीणों को नक्सली समझ कर गोलीबारी की थी. जवानों की गोली लगने से इस घटना में चार नाबालिग समेत कुल आठ लोग मारे गए थे.

वहीं सितंबर 2021 में एडसमेटा एनकाउंटर पर एक न्यायिक जांच रिपोर्ट राज्य कैबिनेट को सौंपी गई थी. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि मुठभेड़ में मारे गए लोग माओवादी नहीं थे और सुरक्षा बलों ने शायद ‘आतंक के कारण गोली चलाई होगी’. इस घटना पर जस्टिस वी के अग्रवाल की कमेटी ने जांच रिपोर्ट के फैसले के आधार पर कहा था कि मारे गए सभी लोग ग्रामीण थे. उनका माओवादियों से कोई संबंध नहीं था.

मंगलवार को एडसमेटा और आसपास के गांवों के सैकड़ों आदिवासी पुस्नार में जमा हो गए और धरना शुरू कर दिया.

बुधवार को ग्रामीणों ने एक तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा और आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और एनकाउंटर में मारे गए हर आदिवासी को एक करोड़ का मुआवजा देने की मांग की है.

बस्तर की आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी भी बुधवार को मौके पर पहुंची और अपना समर्थन व्यक्त किया. सोरी ने कहा, “हम निर्दोष आदिवासियों की हत्या के आरोपी सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी की मांग कर रहे हैं.”

क्षेत्र में काम कर रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द पुलिसकर्मियों को सजा देनी चाहिए.

बस्तर क्षेत्र में काम करने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया ने कहा, “अगर कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है तो न्यायिक जांच का कोई मतलब नहीं है. रिपोर्ट अभी तक विधानसभा में पेश नहीं की गई है जैसा कि आधिकारिक प्रक्रिया है. सरकार रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य है. अधिकारियों सहित दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित करें और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दें. सरकार किसी आम हत्यारे की तरह छिप नहीं सकती.”

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सरकार न्यायिक आयोग की सिफारिशों के आधार पर जरूरी निर्देश जारी कर सकती है.

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, “स्थानीय प्रशासन और पुलिस ग्रामीणों के साथ संपर्क में हैं और उन्हें समझाया कि एडसमेटा न्यायिक जांच रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जानी बाकी है. उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद सरकार न्यायिक आयोग की सिफारिशों के आधार पर जरूरी निर्देश जारी कर सकती है.”

आईजी ने आगे कहा कि जहां तक ​​नए आधार शिविर खोलने के विरोध का सवाल है तो ग्रामीण अपने मोहल्ले में सुरक्षा शिविरों से होने वाले लाभों से अवगत हैं.

साथ ही उन्होंने कहा, “बस्तर में खोले गए प्रत्येक सुरक्षा शिविर ने एक एकीकृत विकास केंद्र के रूप में काम किया है और इस क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाए हैं. नक्सली कैडरों की मजबूरी के कारण ग्रामीण इस तरह का विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं.”

(तस्वीर प्रतिकात्मक है)

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