असम के आदिवासी संगठन भड़के, विधान सभा घेराव और असम बंद होगा

चाय बाग़ानों में काम करने वाले आदिवासी समुदायों के साथ साथ असम के कई और समुदाय ख़ुद को जनजाति की सूचि में शामिल करने की माँग लंबे समय से कर रहे हैं. लेकिन हाल ही में जब केन्द्र सरकार ने 5 राज्यों के कई समुदायों को जनजाति की सूचि में शामिल करने का फ़ैसला किया तो असम के प्रस्ताव पर विचार नहीं हुआ.

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असम में ‘टी ट्राइब’ कह जाने वाले आदिवासी समुदायों को जनजाति की सूचि में शामिल करने के मसले पर असम सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं. विधान सभा में इस मसले पर सरकार का पक्ष रखते हुए शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने कहा कि इस विषय पर केंद्र को ही फ़ैसला करना है.

उन्होंने कहा कि असम में टी ट्राइब कहे जाने वाले आदिवासी समुदायों के 98 उप समूह या उपशाखा हैं. इनमें से 36 उपशाखाओं को जनजाति सूचि में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था. उन्होंने कहा कि असम के 6 मूलवासी समुदायों (Ethnic Group) को जनजाति की सूचि में शामिल करने पर केंद्र विचार कर रहा है.

इस चर्चा में उन्होंने कहा कि बेशक इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देना और औपचारिक तौर पर अनुसूचित जनजाति का दर्जा देना केंद्र सरकार के ही हाथ में है. लेकिन जब तक यह काम नहीं होता है इन समुदायों के इलाक़े में विकास रूकेगा नहीं. 

उन्होंने दावा किया कि असम सरकार ने इन समुदायों के विकास के लिए 500 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. उन्होंने कहा कि जो 6 समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्जा माँग रहे हैं उनमें हर समुदाय के हिस्से में कम से कम 25 करोड़ रूपये आते हैं. 

इस मामले में टी ट्राइब के संगठन राज्य सरकार बेहद नाराज़ हैं. इन संगठनों ने ऐलान किया है कि 22 सितंबर को राज्य विधान सभा का घेराव किया जाएगा. इस सिलसिले में MBB को जानकारी देते हुए ऑल संथाल स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष मिन्टू हेम्ब्रम ने कहा कि उनके समुदाय के साथ बार बार धोखा किया जा रहा है.

उनका आरोप है कि असम की राज्य सरकार अलग अलग राजनीतिक कारण से इस मामले को टाल रही है. उनके अनुसार सरकार की उपेक्षा की वजह से 70-80 लाख की आदिवासी आबादी संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा से महरूम है. 

वो कहते हैं, ” हम लोग दिल्ली गए थे और वहाँ पर जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा जी से मिले थे. उन्होंने हमें बताया कि असम सरकार की तरफ़ से उन्हें कोई प्रस्ताव ही नहीं मिला है. ” 

MBB से विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा, ” हमारी स्थिति को समझने और हमें जनजाति की सूचि में शामिल करने के दावे की पड़ताल करने वाली कमेटी के अध्यक्ष आज के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वाशर्मा ही थे. लेकिन अफ़सोस की उन्होंने भी हमारे साथ इंसाफ़ नहीं किया है. “

अपनी नाराज़गी प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि विधान सभा घेराव के बाद आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा. इस सिलसिले में 26 सितंबर को असम बंद का आयोजन किया जाएगा. 

उन्होंने यह भी बताया कि इन समुदायों के विकास के लिए पहले ही स्वायत्त परिषदों का गठन किया जा चुका है. 

14 सितंबर 2022 को केन्द्रीय मंत्री मंडल ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पाँच राज्यों के कई आदिवासी समुदायों को जनजाति की सूचि में शामिल करने का फ़ैसला किया है. इन राज्यों में छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल हैं.

इस सूचि में असम के समुदायों के प्रस्ताव को शामिल नहीं किया गया. ज़ाहिर तौर पर असम के ये समुदाय इस बात से नाराज़ थे. अपनी नाराज़गी प्रकट करने के लिए इन समुदायों ने असम की कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी किया था. 

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