आदिवासियों को अवैध शराब से बचाया जाए – केरल हाईकोर्ट

भारत में शराब का सेवन ग़रीब और सामाजिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समूहों, ख़ासकर आदिवासियों के बीच ज़्यादा है. केरल में ही पनिया आदिवासी समुदाय के बीच हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इस समूह में शराब का सेवन एक बड़ी समस्या है.

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केरल हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आदिवासी समुदायों के बीच अवैध शराब और नशीले पदार्थों के सेवन को कम करने लिए क़दम उठाए जाएं. कोर्ट ने पुलिस, वन और दूसरे अधिकारियों को यह निर्देश दिया है.

कोर्ट ने वायनाड, निलम्बूर और कोक्कातोड के आदिवासी इलाकों में सुधार के लिए उठाए गए क़दमों पर एक रिपोर्ट भी मांगी है. ज़िला कलेक्टरों को तीन महीने के अंदर यह रिपोर्ट सौंपनी है.

अदालत ने अलग-अलग मुद्दों पर दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया. यह याचिकाएं अट्टपाडी के आदिवासियों के बीच अवैध शराब के सेवन, आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार, अविवाहित माताओं की बढ़ती संख्या, और अप्राकृतिक मौतों और भू-माफिया गतिविधियों के बारे में थीं.

पिछले हफ़्ते ही वायनाड ज़िले के कलपट्टा में आदिवासियों के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर एक बैठक हुई थी. ज़िला विकास समिति की इस बैठक में केरल सरकार की विमुक्ति परियोजना को मज़बूत करने का निर्णय लिया गया था.

इस बैठक में एक्साइज़ डिपार्टमेंट को आदिवासी बस्तियों में नशीले पदार्थों की लत के ख़िलाफ़ जागरुकता अभियान तेज़ करने को कहा गया था.

इस बैठक में आदिवासी बच्चों के बीच कुपोषण से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी. यह भी फ़ैसला लिया गया कि बाल विवाह के ख़िलाफ़ जागरुकता अभियान चलाया जाएगा.

केरल सरकार ने विमुक्ति परियोजना 2016 में लॉन्च की थी

केरल सरकार ने 2016 में नशीले पदार्थों के सेवन को कम करने के लिए विमुक्ती परियोजना लॉन्च की थी. उस समय एक अध्ययन में पाया गया था कि तंबाकू की खपत में 105 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

स्कीम को लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा था कि उत्सवों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान शराब का सेवन एक स्वीकार्य प्रथा बन गई है.

दरअसल, नीलगिरी की पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासियों के बीच शराब और दूसरे नशीले पदार्थों के सेवन की वजह से आत्महत्या के मामले भी बढ़ रहे हैं.

एक स्टडी में पाया गया है कि भारत में शराब का सेवन ग़रीब और सामाजिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समूहों, ख़ासकर आदिवासियों के बीच ज़्यादा है. केरल में ही पनिया आदिवासी समुदाय के बीच हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इस समूह में शराब का सेवन एक बड़ी समस्या है.

शराब की आसान उपलब्धता, और कई जगह शराब का अवैध उत्पादन पनिया आदिवासियों को आकर्षित करता है.

पनिया पुरुषों के बीच शराब के सेवन में बढ़ोतरी की वजह सामाजिक और आर्थिक भेदभाव हैं. यह भी पाया गया है कि पनिया पुरुषों को अकसर उनके काम के लिए पैसे की जगह शराब दी जाती है.

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