मणिपुर: गिरफ्तार आदिवासी छात्र नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर भारी विरोध

छात्र संगठनों ने आदिवासी छात्र नेताओं को कथित रूप से हिरासत में लेने के लिए राज्य सरकार की निंदा की. उन्होंने कहा कि नेता पुलिस हिरासत में रखे जाएँ यह उचित नहीं हैं और उनके साथ सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए.

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मणिपुर के इंफाल में विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों आदिवासी छात्रों ने गुरुवार को अखिल आदिवासी छात्र संघ मणिपुर (All Tribal Students Union Manipur) के अध्यक्ष सहित नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिन्हें मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था.

दरअसल राज्य के पहाड़ी जिलों में एटीएसयूएम द्वारा 3 अगस्त को शाम 6 बजे से 4 अगस्त को शाम 6 बजे तक 24 घंटे के बंद के आह्वान के ठीक एक दिन बाद छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया गया था.

उन्होंने मांग की है कि मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्र) स्वायत्त जिला परिषद विधेयक 2021 (Autonomous District Councils Bill 2021) को 12वीं मणिपुर विधानसभा के मौजूदा दूसरे सत्र में पेश नहीं किया जाए. आदिवासी छात्र संघ ने भी उनकी मांग पर ध्यान नहीं देने पर और तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी थी.

ईस्टमोजो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर यूनिवर्सिटी ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (MUTSU), ऑल कॉलेज ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन इम्फाल (ACTSUI) और ज्वाइंट ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (JTSU) ने इंफाल पश्चिम में आदिमजाति शिक्षा आश्रम, चिंगमीरोंग में गुरुवार के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया.

एक संयुक्त प्रेस बयान में, छात्र संगठनों ने कहा, “एटीएसयूएम नेता हमारे प्रतिनिधि हैं. वे उन लोगों के प्रति जवाबदेह हैं जिन्होंने उन्हें चुना है. बहुत लंबे समय से हम अपने ही राज्य में अपने अधिकारों से वंचित हैं. राज्य सरकार को जागने और हमारे प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू करने की जरूरत है.”

छात्र संगठनों ने आदिवासी छात्र नेताओं को कथित रूप से हिरासत में लेने के लिए राज्य सरकार की निंदा की. उन्होंने कहा कि नेता पुलिस हिरासत में रहने के लायक नहीं हैं और उनके साथ सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए.

ईस्टमोजो ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि इंफाल पश्चिम पुलिस ने मंगलवार को आदिवासी छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए लोगों में एटीएसयूएम के अध्यक्ष पोटिनथांग लुफेंग, महासचिव एसआर एंड्रिया और दो अन्य कार्यकारी सदस्य शामिल हैं. उन्हें कथित तौर पर चिंगमीरोंग के आदिमजती शिक्षा आश्रम में एटीएसयूएम के कार्यालय से उठाया गया था.

बंद के आह्वान के बाद, इंफाल पश्चिम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राज्य के पहाड़ी ज़िलों में आर्थिक नाकेबंदी की साजिश रचने के आरोप में एटीएसयूएम के पांच नेताओं को 6 अगस्त तक चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

ईस्टमोजो की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी छात्र संगठन ने पहाड़ी जिलों में अनिश्चितकालीन आपातकालीन बंद का आह्वान किया और अपने सदस्यों की तत्काल रिहाई की मांग की.

कंगपोकपी ज़िले में आदिवासी छात्र संघों के सदस्यों ने मंगलवार शाम राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, जिससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई. अन्य स्थानों के अलावा, उखरूल ज़िले में भी इसी तरह का आपातकालीन बंद दर्ज किया गया था, जहां इसे एटीएसयूएम की इकाई तंगखुल कटामनाओ सकलोंग द्वारा लगाया गया था.

एटीएसयूएम ने बुधवार को 12वीं मणिपुर विधानसभा के चल रहे दूसरे सत्र में मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्रों) जिला परिषद (छठे संशोधन) विधेयक, 2022 (Manipur (Hill Areas) District Councils (Sixth Amendment) Bills, 2022) का छठा और सातवां संशोधन पेश करने की कड़ी निंदा की और इसे खारिज कर दिया.

एटीएसयूएम के उपाध्यक्ष वनलालियन खौटे ने मीडिया को बताया कि छात्र संगठन और उसकी संघ इकाइयों को लगता है कि यह सदन में थोपा गया एक विधेयक था.

(Image Credit: EastMojo)

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