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AIIMS में आदिवासी, दलित और ओबीसी के साथ सीनियर पदों पर भर्ती में भेदभाव होता है – संसदीय समिति

ऐम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) में जानबूझ कर आदिवासी, दलित और ओबीसी के लिए आरक्षित सीनियर फ़ैकल्टी पदों को खाली रखा जाता है. कमेटी ने कहा है कि जब तक चयन समिति (Selection Panel) में इन वर्गों का प्रतिनिधत्व नहीं होगा तब तक यह भेदभाव चलता रहेगा.

(AIIMS Apointments) – अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में आदिवासियों और दलितों (Adivasi and Dalit) के लिए आरक्षित पदों को जानबूझ कर खाली रखा जाता है. 

अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पदों के लिए इन समुदायों से आने वाले प्रत्याशियों के साथ भेदभाव किया जाता है. आदिवासी और दलितों के पदों को खाली रखने के लिए सिलेक्शन पैनल इस वर्ग के उम्मीदवारों को कम नंबर देते हैं. 

यह जानकारी मंगलवार को संसद की स्थाई समिति ने सदन में दी है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2018 में ऐम्स में 16 सीनियर फैक्लटी के पद खाली रहे क्योंकि पैनल को इन पदों के लिए अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं मिला. 

इसी तरह से साल 2022 में 12 पद खाली रहे क्योंकि किसी आदिवासी, दलित या ओबीसी (Adivasi, Dalit and OBC) को इन पदों के काबिल नहीं माना गया.

अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थाई समिति ने इस बारे में सरकार की सफ़ाई को खारिज कर दिया है. कमेटी ने कहा है कि सरकार ने इस मामले में घिसापिटा जवाब दिया है. 

संसदीय समिति ने कहा है कि ऐम्स दिल्ली में सीनियर फैकल्टी पदों पर भर्ती के दौरान आदिवासियों- दलित और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया जाता है.

इस भेदभाव के बारे में  बताते हुए कमेटी ने कहा है कि आदिवासियों, दलितों और ओबीसी वर्ग के लोगों को इन पदों से वंचित रखने के लिए ऐसा किया जाता है.

इस सिलसिले में संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि इन पदों की भर्ती के लिए बनी चयन समितियों में आदिवासी, दलित और ओबीसी के लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए.

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संसदीय पैनल के अनुसार जब तक सिलेक्शन कमेटी में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं होगा तब तक भेदभाव होता रहेगा. संसदीय समिति ने इस रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया है कि ऐम्स एक्ट (AIIMS Act) में ज़रूरी बदलाव किया जाए जिससे सिलेक्शन कमेटी में आदिवासी, दलित और ओबीसी का प्रतिनिधित्व को अनिवार्य बनाया जाए.

इस रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई है कि सुपर स्पेशलिटी कोर्स में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता है. 

ऐम्स या देश के अन्य शीर्ष शिक्षा संस्थानों में आदिवासी, दलित या ओबीसी के छात्रों के साथ भेदभाव की ख़बरें अक्सर आती हैं. कई बार इन संस्थानों में वंचित तबकों के छात्र दबाव को झेल नहीं पाते हैं. इसलिए इन वर्गों के छात्रों का ड्रॉप आउट भी होता रहता है.

लेकिन ऐम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान जिसकी स्थापना बाकायदा संसद के ऐक्ट से हुई है, वहां पर सिलेक्शन में अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के साथ भेदभाव शर्मनाक है.

कमेटी ने इस पूरे मामले की तह में पहुँचने की कोशिश की है. उम्मीद है कि कमेटी के सुझावों पर गौर करते हुए सरकार बिना देरी के ऐम्स ऐक्ट में बदलाव करके, सिलेक्शन पैनल में आदिवासी, दलित और अन्य वंचित तबके को प्रतिनिधत्व करेगी.

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