HomeMain Bhi Bharatपहाड़ी कोरवा: नाबालिग माएँ और लावारिस बच्चे, ख़तरे में पूरा समुदाय

पहाड़ी कोरवा: नाबालिग माएँ और लावारिस बच्चे, ख़तरे में पूरा समुदाय

यह समुदाय अलग थलग रहता है और भीषण ग़रीबी में जीता है. आज भी जंगल से मिलने वाले कंद मूल इनके खाने में शामिल हैं. इन हालात में जब 14-15 साल की और कई बार उससे भी कम उम्र की लड़कियाँ माँ बन जाती हैं तो माँ और बच्चे दोनों पर ख़तरा बढ़ जाता है.

पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए यह आम बात है. इस समुदाय में लड़के लड़कियों की उम्र 12-13 साल होते होते उनकी शादी हो जाती है. इसके अलावा इस समुदाय में बिना शादी के भी लड़के लड़कियाँ साथ रह सकते हैं. शादी इस समाज में कोई बंधन नहीं है और ना ही बिना शादी किए बच्चे पैदा करना बुरा माना जाता है.

इस समाज में औरत कभी भी इस रिश्ते से बाहर आ सकती है. बच्चे पैदा होने के बाद भी. इस तरह से बिना शादी के बच्चे पैदा करने वाले लड़के लड़कियाँ भी अलग हो सकते हैं. इस सूरत में बच्चे पालने की ज़िम्मेदारी आमतौर पर लड़के के परिवार की होती है.

अगर कोई औरत अपने पति को छोड़ कर किसी दूसरे पुरूष के साथ रहना चाहे तो इस पर पहला पति ऐतराज नहीं करता है और ना ही समुदाय उसे ऐसा करने की अनुमति देता है. विधवा होने पर भी औरत को अपने मन का पुरूष चुन कर उसके साथ रहने की अनुमति होती है.

रिश्तों में खुलापन और औरत पर रिश्तों के बोझ ढोने की ज़िम्मेदारी यह समाज नहीं डालता है, इस लिहाज़ से इस सामाजिक व्यवस्था को प्रगतिशील कहा जा सकता है.

लेकिन ज़मीनी हालात अलग हैं. यह समुदाय अलग थलग रहता है और भीषण ग़रीबी में जीता है. आज भी जंगल से मिलने वाले कंद मूल इनके खाने में शामिल हैं. इन हालात में जब 14-15 साल की और कई बार उससे भी कम उम्र की लड़कियाँ माँ बन जाती हैं तो माँ और बच्चे दोनों पर ख़तरा बढ़ जाता है.

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